Wednesday, September 28, 2011

मप्र में बेटियों वाले माता-पिता को सबला कार्ड देने की पहल


बालाघाट में बेटियों वाले माता-पिता को सबला कार्ड देने का निर्णय लिया गया है। बेटी बचाओ अभियान की तैयारियों के दौरान जिला प्रशासन के सामने यह बात आई कि ऐसे माता-पिता जिनकी केवल बेटियां हैं, वे अपनी जमीन पर किसी अन्य के द्वारा कब्जा कर लेने या लड़ाई-झगड़ा होने की स्थिति मे स्वयं को असहाय पाते हैं। बेटे न होने के कारण उन्हें बिजली बिल जमा करने, गैस सिलेंडर लाने और अन्य जरूरी कामों के लिए अपनी बेटी को भेजने में असहजता महसूस होती है। ऐसे माता-पिता की परेशानियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने निर्णय लिया कि उन्हें पांच अक्टूबर को बेटी बचाओ अभियान के अवसर पर एक विशेष कार्ड दिया जाए। इस कार्ड का नाम सबला कार्ड होगा। इसके साथ ही जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम भी खोलने का निर्णय लिया गया है। जिस पर सबला कार्ड वाले माता-पिता मदद के लिए सूचना दे सकेंगे। कंट्रोल रूम को सूचना मिलने पर प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगी। जिले में सबला कार्ड वाले दंपत्तियों को बिजली बिल जमा करने या बैंक आदि में कतार में न लगकर विशेष प्राथमिकता दिलाने पर भी विचार किया जा रहा है।

क्या हैं महिला अधिकार


देश में महिला अधिकार की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है लेकिन देश की ज्यादातर महिलाओं को सही मायनों में उनके मौलिक अधिकारों अथवा संवैधानिक अधिकारों की जानकारी ना के बराबर है। आइए, जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुसार महिलाओं को क्या-क्या हक प्रदान किये गए हैं-
भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 14, 15 और 16 में देश के प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार दिया गया है। समानता का मतलब समानता’, इसमें किसी प्रकार का लिंग भेद नहीं है। समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार महिला-पुरुष दोनों को समान रूप से दिया गया है। शारीरिक और मानसिक तौर पर नर-नारी में किसी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक माना गया है। हालांकि आवश्यकता महसूस होने पर महिलाओं और पुरुषों का वर्गीकरण किया जा सकता है। अनुच्छेद-15 में प्रावधान किया गया है कि स्वतंत्रता, समानता और न्याय के साथ महिलाओं/लड़कियों की सुरक्षा और संरक्षण का काम भी सरकार का कर्तव्य है। जैसे बिहार में लड़कियों के लिए साइकिल और पोशाक की योजना, मध्य प्रदेश में लड़कियों के लिए लाडली लक्ष्मीयोजना, दिल्ली में मेट्रो में महिलाओं के लिए रिजर्व कोच की व्यवस्था आदि।ा अधिकार
स्वतंत्रता और समानता का अधिकार : अनुच्छेद-19 में महिलाओं को यह अधिकार दिया गया है कि वे देश के किसी भी हिस्से में नागरिक की हैसियत से स्वतंत्रता के साथ आ-जा सकती हैं रह सकती हैं। व्यवसाय का चुनाव भी स्वतंत्र रूप से कर सकती हैं। महिला होने के कारण किसी भी कार्य के लिए मना करना उसके मौलिक अधिकार का हनन होगा। ऐसा होने पर वे कानून की मदद ले सकती हैं। महिल्
नारी की गरिमा का अधिकार : अनुच्छेद-23 नारी की गरिमा की रक्षा करते हुए उनको शोषण-मुक्त जीवन जीने का अधिकार देता है। महिलाओं की खरीद-बिक्री, वेश्यावृत्ति के धंधे में जबरदस्ती लाना, भीख मांगने पर मजबूर करना आदि दंडनीय अपराध है। ऐसा कराने वालों के लिए भी भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत सजा का प्रावधान है। संसद ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 पारित किया है। भारतीय दंड संहिता की धारा-361, 363, 366, 367, 370, 372, 373 के अनुसार ऐसे अपराधी को 7 साल से लेकर 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा भुगतनी पड़ क्या ह सकती है। अनुच्छेद-24 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के लड़के या लड़कियों से काम करवाना बाल अपराध है।
घरेलू हिंसा का कानून : घरेलू हिंसा अधिनियम , 2005 जिसके तहत वे सभी महिलाएं जिनके साथ किसी भी तरह की घरेलू हिंसा की जाती है, उनको प्रताड़ित किया जाता है, वे सभी पुलिस थाने जाकर दर्ज करा सकती हैं तथा पुलिसकर्मी बिना समय गंवाए प्रतिक्रिया करेंगे।
दहेज निवारक कानून : दहेज लेना ही नहीं, देना भी अपराध है। अगर वधू पक्ष के लोग दहेज लेने के आरोप में वर पक्ष को कानूनी सजा दिलवा सकते हैं तो वर पक्ष भी इस कानून के ही तहत वधू पक्ष को दहेज देने के जुर्म में सजा करवा सकता है। 1961 से लागू इस कानून के तहत वधू को दहेज के नाम पर प्रताड़ित करना भी संगीन जु र्म है।
नौकरी/स्व व्यवसाय करने का अधिकार : संविधान के अनुच्छेद-16 में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि हर वयस्क लड़की व महिला को कामकाज के बदले वेतन प्राप्त करने का अधिकार पुरु षों के बराबर है। केवल महिला होने के नाते रोजगार से वंचित करना, किसी नौकरी के लिए अयो ग्य घोषित करना लैंगिक भेदभाव माना जाएगा।
प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार : अनुच्छेद-21 एवं 22 दैहिक स्वाधीनता का अधिकार प्रदान करता है। हर व्यक्ति को इज्जत के साथ जीने का मौलिक अधिकार संविधान द्वारा प्रदान किया गया है। अपनी देह व प्राण की सुरक्षा करना हरेक का मौलिक अधिकार है।
राजनीतिक अधिकार : प्रत्येक महिला व वयस्क लड़की को चुनाव की प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से भागीदारी करने और स्व विवेक के आधार पर वोट देने का अधिकार प्राप्त है। कोई भी संविधान-सम्मत योग्यता रखने पर किसी भी तरह के चुनाव में उम्मीदवारी कर सकती है।

Tuesday, September 27, 2011

सऊदी अरब की महिलाओं को मिला वोट का हक


..लेकिन 2015 से पहले नहीं
पश्चिम एशिया में लोकतांत्रिक और सामाजिक सुधारों के लिए चल रहे आंदोलनों के बीच सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल साद ने महिलाओं को मतदान और चुनाव लड़ने का अधिकार देने की घोषणा की है। श्री अब्दुल्ला ने अपने पांच मिनट के भाषण में कहा कि महिलाओं को शूरा परिषद में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। शूरा निर्वाचित संस्था नहीं है और इसके द्वारा बनाए कानून बाध्यकारी नहीं हैं। उन्होंने कहा, हमने शीर्ष उलेमा और अन्य विद्वानों से सलाह-मशविरा करके महिलाओं को अगले कार्यकाल से शूरा परिषद का सदस्य बनाने की अनुमति देने का फैसला किया है। महिलाएं निगम चुनावों में चुनाव लड़ सकती हैं और उन्हें मतदान का अधिकार होगा। सऊदी अरब में अगले सप्ताह होने वाले निगम चुनावों में केवल पुरुषों को ही मतदान का अधिकार होगा लेकिन महिलाओं को 2015 में होने वाले चुनावों में मतदान का अधिकार हासिल होगा। सऊदी अरब में इस कदम को बड़े सामाजिक बदलाव का द्योतक माना जा रहा है। अमेरिका ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे महिलाओं को उनकी जिंदगी से जुड़े मुद्दे पर होने वाले फैसलों में भागीदारी का मौका मिलेगा। व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि यह सऊदी अरब में महिला को उनके अधिकार देने की दिशा में एक अहम कदम है।



कहीं नहीं सुरक्षित


समाज में बढ़ते अपराधों की चर्चा के क्रम में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की फेहरिस्त बहुत लंबी मानी जाएगी। और इनमें सबसे जघन्य माना जाने वाला बलात्कार और यौन हिंसा का अपराध तो ऐसा नासूर है जिसका उपचार मौजूदा सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी ढांचे में खोजना फिलहाल संभव नहीं दिखता। हालांकि इस अपराध पर नियंतण्रपाने की हरसंभव कोशिशों की बात पंचायत स्तर से लेकर देश की संसद तक में लगातार की जाती रही है, इसके लिए कड़े कानूनों का भी प्रावधान है और शासन-प्रशासन भी इस अपराध को काबू में करने के दावे जब-तब करता रहता है लेकिन समय- समय पर जारी होने वाले सव्रे सारी पोल खोल देते हैं। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च (सीएसआर) द्वारा कराये गये ऐसे ही एक सव्रे के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली में यौन हिंसा के मामले में महिलाएं दिन में भी सुरक्षित नहीं हैं। वे दिन-दहाड़े और घर-बाहर कहीं भी बलात्कार की शिकार हो सकती हैं। जुलाई 2009 से 2011 के बीच दिल्ली के बारे में जारी इस सव्रे के अनुसार बलात्कार पीड़िताओं द्वारा दर्ज पुलिस रिपोर्ट और चिकित्सकों की रिपोर्ट बताती हैं कि राजधानी में यह जघन्य अपराध रात के अंधेरे में ही नहीं बल्कि दिन की उजाले में भी बेखौफ अंजाम दिया जाता रहा है। उक्त रिपोर्ट महिलाओं के प्रति यौन अपराध या अत्याचार के मामले में एक नहीं अनेक कोणों से खुलासा करती नजर आती है जिसमें हमारे सामाजिक ताने-बाने के विद्रूप हो जाने की तस्वीर साफ-साफ उजागर होती दिखती है। यह स्थिति हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश के लिए ऐसा अभिशाप साबित हो रही है, जहां मनुष्य और पशु के बीच कोई भेद नहीं रह जाता। किसी अनजान वहशी द्वारा राह चलती युवती को हवस का शिकार बनाना बेशक नई खबर न हो लेकिन सामाजिक विद्रूपता का एक भयावह सच यह सामने आ रहा है कि अधिकतर मामलों में बलात्कार पीड़िता अपने किसी नजदीकी सगे-संबंधी, पास- पड़ोसी या जान-पहचान वाले द्वारा छली जाती रही है। यह स्थिति समाज में अपनों पर अविास और भावनाओं के क्षरण के वातावरण की ऐसी निर्मिति कर रही है, जहां न कोई पिता है, न भाई, न पति और न ही मित्र। जहां केवल एक नारी देह है जो कहीं भी किसी भी समय किसी लोलुप कामी की हवस का शिकार होने को अभिशप्त है। अध्ययन इस आशय से भी महत्वपूर्ण है कि यह देश की राजधानी को आधार मानकर किया गया है जो पूरे देश की स्थिति समझने के लिए पर्याप्त है। इसलिए कि राजधानी होने के कारण पुलिस सुरक्षा या अन्य सुविधाओं के मामले में दिल्ली देश के बाकी हिस्सों से ज्यादा सम्पन्न मानी जाती है। और जब राजधानी में ही दिन-दहाड़े बलात्कार की घटनाएं घट रही हों तो दूर-दराज के शहर या गांव- कस्बों की महिलाएं कितनी सुरक्षित होंगी, यह बखूबी समझा जा सकता है। एक बात और कि बलात्कार के खिलाफ पर्याप्त जागरूकता के बावजूद हमारा समाज अब भी खुलकर बोलने में हिचकता है। दिल्ली जैसे महानगर तक में जब करीब आधे ही वारदात के तुरंत बाद पुलिस के सामने आते हैं और कुछेक एक या दो दिन बाद और कुछ उसके भी कई दिनों बाद तो न जाने कितने तो दबे ही रह जाते होंगे जो बलात्कारियों का हौसला बढ़ाने का काम करते होंगे।