Monday, December 20, 2010

महिलाओं की पंचायत

महिलाओं की पंचायत झारखंड में लोकसभा की 14 सीटों में एक पर भी महिला प्रत्याशी की विजय नहीं, जबकि विधानसभा की 81 सीटों में मात्र आठ महिला जनप्रतिनिधि निर्वाचित और महज चार जिलों की 498 पंचायतों के लिए प्राप्त चुनाव परिणाम में 1,994 पुरुषों के सापेक्ष 2,457 महिला प्रत्याशियों की जीत झारखंड के भविष्य के लिए एक क्रांतिकारी संकेत है। इस राज्य में 24 जिले हैं, जिनमें चार चरणों में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हो रहे हैं। पिछले दो चरणों में हुए चुनाव के दौरान चार जिलों कोडरमा, पाकुड़, जामताड़ा और रामगढ़ में हुए मतदान के घोषित परिणाम में महिला उम्मीदवारों की 55 फीसदी उपलब्धि चौंकाने वाली नहीं, बल्कि गांव-गिरांव में महिलाओं के प्रति लोगों में आस्था का प्रतीक है। डा. राम मनोहर लोहिया ने महिलाओं को 60 प्रतिशत आरक्षण देने की वकालत की थी। उनकी बात पर उस समय बहुत गौर नहीं किया गया था लेकिन आधी शताब्दी के बाद झारखंड के ये परिणाम यह बता रहे हैं कि समाज की धारा किस ओर जा रही है। बतौर जनप्रतिनिधि पुरुषों पर हमारा ग्रामीण समाज बहुत विश्र्वास नहीं कर पा रहा। राज्य की पंचायतों में 50 फीसदी महिला आरक्षण की व्यवस्था है लेकिन चुनाव परिणाम इस सीमा को फांद चुके हैं। सवाल यह कि लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में ऐसा परिणाम क्यों नहीं आया? राजनीति शास्त्र, समाज शास्त्र, मनो विज्ञान और अर्थ शास्त्र के अध्येताओं के लिए यह एक दिलचस्प अध्ययन हो सकता है। यहां यह जानना भी दिलचस्प होगा कि पंचायत चुनावों की अपेक्षा अन्य चुनावों में मतदान का प्रतिशत कम होता है, जबकि पंचायतों के लिए घर की देहरी से बाहर निकलने में महिलाओं ने कोई परहेज नहीं किया। वे अपने चुनाव प्रचार में तो निकलीं ही, मतदान के लिए भी गई।

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