Wednesday, February 2, 2011

यूपी में सुरक्षित नहीं महिलाओं की आबरू


सूबे की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। गुनहगारों में माननीयों से लेकर पुलिसकर्मियों तक का नाम शामिल हैं। न्याय की आस में इन अबलाओं की चीख व्यवस्था की चौखट पर दम तोड़ रही हैं। कानपुर की दिव्या और बांदा की शीलू जैसे कुछ गिनती के मामले हैं, जिसमें भारी हंगामे के बाद कार्रवाई हुई वरना अधिकांश मामले दफन हो गए हैं। दुराचार के मामले को पुलिस किस तरह दबाती है, इसके लिए बांदा में विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी और उनके साथियों के सामूहिक बलात्कार की शिकार शीलू का उदाहरण काफी है। अब उसी तरह का मामला इटावा में सामने आया है, जहां भरथना विधायक के स्कूल के प्रधानाचार्य ने सोनम नामक महिला के साथ बलात्कार किया और बाद में उसे विधायक के प्रभाव से जेल भिजवा दिया। सूबे की पुलिसिया कार्यशैली को बयां करने वाले ऐसे किस्से गांव-शहर में भरे पड़े हैं। इन दो मामलों को कौन भूल सकता है। फैजाबाद के विधायक आनंद सेन तो शशि की हत्या और दुराचार के मामले में पिछले दो वर्षो से जेल में हैं पर सत्तापक्ष की फजीहत होने के बाद। सुल्तानपुर में चर्चित मामला समरीन का है जिसने सपा विधायक अनूप सण्डा के खिलाफ पिछले वर्ष अगस्त में दुराचार की रिपोर्ट लिखाई थी। पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो सूबे में वर्ष 2010 में 1290, 2009 में 1552 और 2008 में 1696 महिलाओं के साथ बलात्कार के मुकदमे पंजीकृत किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि बलात्कार की घटनाओं में कमी आई है। मगर विपक्षी दल इसे गुनाहों पर आंकड़ों का पर्दा बताते हैं। बलात्कार के मामलों में डिबाई के बसपा विधायक भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित, बिल्सी के विधायक योगेंद्र सागर और नरैनी विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी ने सरकार की खूब किरकिरी कराई। इसी क्रम में ताजा मामला गाजियाबाद से जुड़ा है जहां प्रदेश सरकार के एक मंत्री के रिश्तेदार को शनिवार को बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया है। बात यहीं खत्म नहीं होती। जून 2010 में लखनऊ में बाजारखाला थाने के सिपाही अरुण यादव ने प्रतापगढ़ की एक छात्रा के साथ, मुरादाबाद में एडीएम के बेटे ने छात्रा के साथ, बलिया जिले के शिवपुर मिठया गांव में चार दबंगों ने नवविवाहिता के साथ बलात्कार कर समाज का घिनौना चेहरा सामने किया है। हद तो तब हो गई जब नवंबर में ही ललितपुर जिले में 8 साल के एक नाबालिग ने 4 साल की बालिका के साथ बलात्कार किया। हरदोई जिले में चार युवकों ने कौरिया गांव के बाहर झोपड़ी में रह रही 90 साल की बुजुर्ग महिला के साथ सामूहिक बलात्कार कर एक और कलंक कथा तैयार कर दी। यह कुकृत्य जारी है। दुराचार की शिकार महिलाओं को नहींमिला न्याय बाराबंकी की एक घटना बांदा के शीलू कांड की ही तरह है। घुंघटेर थाना क्षेत्र के ललतापुर मजरे घुंघटेर की एक बालिका को एक दलित युवक 2 फरवरी 2009 को अपहृत कर ले गया। इसके पश्चात उसे एक पार्टी के विधानसभा क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष के घर रखकर करीब एक वर्ष तक उसके साथ दुराचार किया जाता रहा। बालिका ने बच्चे को जन्म दिया तो उसे मृत बताकर गायब कर दिया गया। 18 मार्च 10 को पुलिस ने नेता सहित 3 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। बाद में नेता का नाम मुकदमे से हटा दिया गया। सीतापुर में 2009 में तालगांव का पिंकी कांड चर्चित रहा। अपहरण के बाद उससे सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया गया। दो सप्ताह बाद पिंकी की मौत हो गई। समय से कार्रवाई हुई होती तो पिंकी बचाई जा सकती थी। गोरखपुर के कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के इंदलपुर झझवां में लाल चंद ने बताया कि 5 माह पूर्व उसकी नाबालिग पुत्री के साथ गांव के ही दबंगों ने दुराचार किया। गर्भपात के लिए इंजेक्शन लगवाया और दवा खिलाई। हालत बिगड़ने पर परिजन, पुत्री को लेकर थाने पहुंचे। थाने में ही पुत्री ने मृत बालिका को जन्म दिया। उस समय थानेदार ने कहा था कि शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब तक पुलिस ने रपट दर्ज नहीं की है। गाजीपुर में एक मंदबुद्धि महिला को उसका पड़ोसी 8 माह तक हवश का शिकार बनाता रहा। पीडि़ता की कोख में 7 माह का गर्भ भी था। पुलिस में शिकायत के कई दिनों बाद दुष्कर्मी ने कोर्ट में समर्पण किया। वर्दी भी हुई है दागदार लखनऊ : सूबे के आला पुलिस अधिकारी भले ही यह दावा कर रहे हों कि सूचना मिलने पर उनका महकमा त्वरित कार्रवाई करता है लेकिन हकीकत इससे जुदा है। कई ऐसे मामले हैं जिनमें वर्दी दागदार हुई लेकिन आला अफसरों ने बहुत कड़ा कदम नहींउठाया। उदाहण के तौर पर फर्रुखाबाद में बीते वर्ष में बलात्कार के 11 मामले दर्ज हुए। इनमें एक सिपाही भी एक मामले में फंसा है पर सिपाही की गिरफ्तारी के प्रयास नहीं किए गए। मऊ की एक घटना में तो करीब 6 माह पूर्व सरायलखंसी थाने में तैनात एक सिपाही युवती संग शादी का झांसा देकर दुराचार करता रहा। शिकायत थाने पहुंची तो पुलिस ने कार्रवाई के बजाए पीडि़त पर दबाव बनाकर मामले को सलटा दिया। मीरजापुर में एक थानेदार व दो सिपाहियों के खिलाफ भी बलात्कार का मामला दर्ज है, लेकिन इन खाकी वर्दीधारियों पर कार्रवाई तो दूर वे आज भी जनपद में ही जमे हुए हैं। थानेदार पर विधवा व सिपाहियों पर एक महिला दुकानदार के साथ मुंह काला करने का आरोप है।



No comments:

Post a Comment